नरेश दीक्षित

17 वीं लोक सभा का मतदान अब अंतिम चरण की ओर बढ़ रहा है। यह चुनाव अबतक का सबसे बदतर और बदसूरत चुनाव साबित हुआ है। भाजपा ने झूठ बोलने, नफरत फैलाने, युद्ध भड़काने और खुद को राष्ट्रीय सुरक्षा का एकमात्र संरक्षण के रूप में पेश करने के लिए किसी भी हद तक जा सकती है।
अग्रेंजो द्वारा सत्ता हस्तांतरण के सत्तर साल बाद भी देश में बेरोजगारी, किसानों की दुर्दशा और गरीबी अब भी जनता के जवलंत मुद्दे बने हुए हैं और मोदी के पांच साल के शासन काल में स्थित और भी बदतर हुई है। कारपोरेट मीडिया की मदद् से युद्धों उन्माद फैलाकर इन पर पर्दा डालने का पूरा प्रयास किया गया है।
इस चुनाव में मुख्य सवाल यह है कि क्या हम मोदी को और एक बार प्रधानमंत्री बनने देना चाहते हैं या नहीं? चुनाव प्रचार के दौरान मोदी और संघ परिवार ने साबित किया है कि वे सत्ता में बने रहने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं। मोदी ने पुरे चुनावी अभियान को पुलवामा हमला और बालाकोट हवाई हमले के साथ में सैटलाइट भेदक मिसाइल परीक्षण का इस्तेमाल करते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा पर केन्द्रित रखा है।
जो भी मोदी का विरोध करता है उसे देशद्रोही और देश तोड़ने वाला और पकिस्तान का एजेंट कहा जा रहा है। चुनाव में साम्प्रदायिक उन्माद पैदा किया गया है। लुंज पुंज चुनाव आयोग की परवाह किए बिना बेलगाम अभियान चलाया जा रहा है, मगर यह नहीं बताया जा रहा है कि 2014 में किये गये वायदों में से कितने पुरे हुए हैं या नोटबंदी और जीएसटी के कारण क्या हुआ है।
भाजपा के इस प्रचार अभियान से ही साफ है कि अगर मोदी दुबारा सत्ता में लौट आते है तो संघी एजेंडा लागू किया जायेगा और जो भी स्वतंत्रता के अधिकार और जन कल्याण की योजनाएं हैं उन्हे खत्म कर दिया जायेगा। संविधान के सभी प्रगतिशील मूल्यों को छिन्न-भिन्न कर भारत को एक हिन्दुत्व कट्टरपंथी और कारपोरेट राजसत्ता में बदल दिया जायेगा।
इस सबके बावजूद भी कांग्रेस ने भाजपा को सत्ता से उखाड़ने के लिए अपनी नई न्याय योजना के मध्यम से मोदी को घेर लिया है और चुनाव कांग्रेस बनाम मोदी करने में सफल हो गए हैं। इस से घबडा कर मोदी ने कांग्रेस के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गाँधी पर झूठे एवं स्तर हीन आरोप लगाने शुरू कर दिए है लेकिन चुनाव में इसका भी कोई फायदा मोदी को मिलता नजर नहीं आ रहा है।
प्रज्ञा ठाकुर और भाजपा!
बीएसएनएल को मोदी सरकार ने बर्बाद किया!

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