नरेश दीक्षित

श्री पवन कुमार तत्कालीन सचिव वन एवं वर्तमान प्रधान मुख्य वन संरक्षक और विभागाध्यक्ष उप्र लखनऊ द्वारा बसपा शासन काल में जनपद सोनभद्र में मा० उच्चतम न्यायालय के आदेशों की अवहेलना तथा वन एवं पर्यावरण मंत्रालय के आदेशों का उल्लंघन करने का गंभीर आरोप है।
सोनभद्र में 1083.231हे० आरक्षित वन भूमि को अवैध रूप से गैर वन भूमि दर्शाते हुए उसे जे पी एसोसिएट्स को आवंटित करने तथा राज्य सरकार को रूपया 409.91 करोड़ की राजस्व हानि पहुंचायी गई थी। बसपा व सपा सरकारों के कार्यकाल में इतने गंभीर प्रकरण में शिकायतें करने के बाद भी कोई कार्यवाही न कर ठंडे बस्ते में डाल दिया गया था।
श्री पवन कुमार तत्कालीन विशेष सचिव वन द्वारा फरवरी 2009 में सोनभद्र जनपद में आरक्षित वन भूमि को जे पी एसोसिएट्स को गैर वानिकी उपयोग हेतु भारत सरकार से बिना अनुमति प्राप्त किये ही माननीय उच्चतम न्यायालय के टीडी गोडावर्धन बनाम भारत सरकार के निर्णय 1996 तथा वनवासी सेवा बनाम उप्र,
भारत सरकार के निर्णय 1994 एवं वन संरक्षण अधिनियम 1980 की धारा-3 का उल्लंघन करते हुए तत्कालीन वन मंत्री एवं मा० मुख्यमंत्री जी से प्रस्ताव के बिना अनुमोदन कराये ही अपने स्तर से आवंटन आदेश जारी किया।
तत्पश्चात स्वयं अपने बचाव में मा० उच्चतम न्यायालय नई दिल्ली में आई ए संख्या-2469/ 2009 फाइल किया, जिस पर पर्यावरण एवं वन मंत्रालय भारत सरकार द्वारा आपत्ति करते हुए इस कार्यवाही को अवैधानिक करार करते हुए मा० उच्चतम न्यायालय में एफिडेविट फाइल करते हुए विरोध किया गया।
भारत सरकार के पर्यावरण एवं वन मंत्रालय (मध्य क्षेत्र) लखनऊ ने उप्र शासन को लिखे अपने पत्र में निम्न तथ्यों का उल्लेख किया:-
Tha State Government has changed the status of the forest land in revenue record to avoid applicability of forest ( conservation ) Act to benefit the J P Associates , which is against the order dated 12,12,1996 of Honble Supreme court in WP(C) 202/1995 and direction of Ministry vide letter No 11-28/2005-FC dated 17.02.2015
but it is also against it’s own decision for which the State Government has file Criminal Mise Petition No 16269/2009 in writ petition No 1061/ 1982 in which the State Government has requested the Hon’ble Supreme court for restoration of status of forest in revenue record.
The Controller and Auditor General of India in his audit report No 24 of 2013 mentioned that the State Government has illegally excluded 1083.232 ha forest land and change the State of forest to non-forest in revenue record and thus about Rs. 409.9 crore loss of revenue to the State.
हैरत की बात तो यह है वन विभाग के पूर्व सचिव एवं वर्तमान प्रधान मुख्य वन संरक्षक श्री पवन कुमार के खिलाफ जब कोई कार्यवाही नहीं की गई तो मैंने मा० उच्च न्यायालय इलाहाबाद की खण्ड पीठ लखनऊ में उक्त प्रकरण के विरुद्ध पी आईं एल संख्या 2403/ 2015 Naresh Dixit/ Versus
1.Chief Secretary of UP Government
2. Central Bureau of Investigation New Delhi
3. Principal Secretary forest UP
4 . Ministry of Environment a Forest New Delhi
यह अति महत्व पूर्ण केस अब भी कोर्ट की फाइलों में धूल फांक रहा है लेकिन कोई भी जजमेंट करने में अभी तक कोर्ट को समय नहीं मिला है। इस भूमि घोटाले में सभी पूर्व प्रमुख सचिव वन को समस्त साक्ष्यों के साथ उन्हे बराबर अवगत कराया गया लेकिन आज उक्त प्रकरण में कोई भी कार्यवाही नहीं हुईं हैं।
यदि यह मान भी लिया जाए कि पूर्ववर्ती सरकार भ्रष्टाचार रोकने में नकारा थी तो वर्तमान सरकार की प्रमुख सचिव वन कल्पना अवस्थी के साथ ही मुख्य सचिव, मा0 मुख्यमंत्री, मा0 राज्यपाल को भी पुनः उपरोक्त प्रकरण की उच्य स्तरीय जांच कमेटी गठित कर जांच कराने की मांग की है लेकिन हाल वही है जैसा मायावती, मुलायम सिंह अखिलेश यादव के मुख्य मंत्री के शासन काल में कुछ नहीं हुआ?
तो वर्तमान सरकार के मुख्य मंत्री योगी जी के शासन काल में भी उक्त प्रकरण पर कार्य वाही होना तो दूर रहा वन भूमि बेचने वाले अधिकारी पवन कुमार को प्रधान मुख्य वन संरक्षक की कुर्सी पर बैठाल दिया गया है जबकि योगी जी भ्रष्टाचार मुक्त प्रदेश की बात करते हैं। आखिर जे पी एसोसिएट्स को आरक्षित वन भूमि देने वाले अधिकारी पर योगी सरकार इतनी मेहरबान क्यों है?
धार्मिक आधार पर नागरिकता संशोधन विधेयक आखिर मोदी सरकार क्यों पास करना चाहती हैं?
मथुरा आये और ये मिठाई नहीं खाई तो कुछ नहीं खाया

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here