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25 नवम्बर को अयोध्या में धर्म सभा बीजेपी का राजनैतिक एजेंडा!

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नरेश दीक्षित संपादक समर विचार

देश में लगातार गिर रही भाजपा की साख को बचाने के लिए राम मंदिर का मुद्दा गरमा कर मोदी सरकार 2019 के आम चुनाव के पहले हिन्दू मुस्लिमों को साम्प्रदायिकता की आग में झोंक कर राजनैतिक फायदा उठाना चाहती है।दावा किया जाता है कि वर्ष 1528 में अयोध्या में बाबरी मस्जिद का निर्माण हुआ था।
1949 में बाबरी मस्जिद में गुप्त रूप से भगवान राम की मूर्ति रख दी गई और दावा किया गया कि भगवान राम का यही जन्म स्थान है इसके बाद यह भी सामने आया कि मंदिर हटा कर बाबरी मस्जिद बनाई गई है। 1984 में मंदिर निर्माण के लिए कमेटी गठित हुई। 1986 में विवादित स्थल को श्रद्धालुओं के लिए खोला गया।
इसी साल 1986 में ही बाबरी कमेटी का भी गठन किया गया। 1990 में लालकृष्ण आडवाणी ने देश ब्यापी रथयात्रा निकाल कर हिन्दूओ को संगठित किया लेकिन रथयात्रा अयोध्या तक न पहुंच कर बिहार के समस्तीपुर पहुंचने पर अणवाडी को गिरफ्तार कर लिया गया। लेकिन यात्रा का फायदा उठा कर वर्ष  1991 के चुनाव में बीजेपी को फायदा मिला और प्रदेश में सत्ता में आ गई उसी समय मंदिर बनाने के लिए देश भर से ईंटे और चंदा इकट्ठा किया गया।
6 दिसंबर 1992 को बावरी मस्जिद विध्वंस के साध ही यह मुद्दा हिंसा और नफरत का रूप लेकर पूरे देश में फैले दंगों में 2000 हजार से अधिक लोग मारे गए। इस घटना ने इतिहास को बदल दिया। आज भी इस दिन को मुस्लिम काला दिवस हिन्दू शौर्य दिवस के रूप में मनाते हैं।
लगभग 26 सालों से अयोध्या में विवादित ढांचे और जमीन पर मालिकाना हक के चार मामलों की सुनवाई करने वाली विशेष खंडपीठ ने 30 सितम्बर 2010 को अपना ऐतिहासिक फैसला सुनाया। 10 हजार से अधिक पन्नो के फैसले में जजों ने माना कि विवादित परिसर में 22-23 दिसम्बर 1949 की रात को अचानक मुर्तियां रखी गई और यह प्रचारित किया गया कि राम लला अवतरित हुए हैं।
अदालत ने यह भी तथ्य सामने रखा कि बाबरी मस्जिद का निर्माण बाबर के आदेश पर मीर बांकी ने उस जगह पर किया जिसे पहले से ही हिन्दू राम जन्म स्थान मानते थे। एएसआई की खुदाई में मिले प्रचीन अवशेषों को अदालत ने साक्ष्य के रूप में मनाते हुए कहा इससे लगता है कि मस्जिद का निर्माण मंदिर के स्थान पर हुआ है। हालांकि मंदिर तोड़ कर मस्जिद बनाए जाने के बारे में बेंच में मतभेद था।
अदालत ने पूरी 70 एकड़ विवादित जमीन को तीन हिस्सोंमें बांट दिया। सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा और राम लला पक्ष को बराबर बांट कर हक दिया जाना था।
लेकिन इस फैसले पर रोक लगा दी गई जब से यह मुकदमा सुप्रीम कोर्ट में लम्बित है और इसे सुप्रीम कोर्ट जनवरी 2019 में सुनवाई के लिए पंजीकृत कर लिया है।
लेकिन देश के हिन्दू वादी संगठन सुप्रीम कोर्ट की लगातार अवमानना कर उसे धमका रहे हैं तथा सरकार पर दबाव बनाकर संसद के माध्यम से अध्यादेश लाकर मंदिर निर्माण की बात कर रहे हैं। इसी बीच आम चुनाव नजदीक देख 25 नवम्बर को अयोध्या में धम॔ संसद का आयोजन संत महात्मा ओं को आगे कर देश भर में उत्तेजक पोस्टर लगाए जा रहे हैं।
इस आयोजन का संरक्षण सरकार द्वारा प्राप्त है। भाजपा की बी टीम के नेताओं द्वारा बराबर ऐलान किया जा रहा है कि मंदिर का निर्माण 25 नवम्बर से शुरू किया जायेगा।
6 दिसंबर 1992 को जब दो लाख कार सेवक इकट्ठा हुए थे और कल्याण सिंह द्वारा हर प्रकार की शांति बनाए रखने तथा विवादित ढांचा की सुरक्षा का आश्वासन देने के बाद भी उत्तेजित कारसेवकों ने ढांचे को तोड़ दिया था। अब क्या अयोध्या में यथा स्थित बनाए रखने के लिए योगी सरकार सुप्रीम कोर्ट में शपथ पत्र देगी?
धर्म संसद के नाम पर इकट्ठा की जा रही राम भक्तो की बड़ी भीड़ आने के दावे किए जा रहे हैं। अयोध्या के माहौल में गरमी आती जा रही है। हिन्दू वादी संगठन भी जोर लगाए हुए हैं और योगी सरकार खुद इसमें जुटी हुई हैं। उधर 50 हजार शिवसैनिक भी राम नगरी को जाने की ठान चुके हैं।
तमाम भाजपा नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट को खुले तौर पर चढाई कर दी है और कहते हैं राम मंदिर का रास्ता सुप्रीम कोर्ट से नहीं संसद से ही निकलेगा। सुप्रीम कोर्ट पर उंगलिया उठाने का नतीजा है कि कई राज्य, देश की संस्थाओं को नकारने लगे हैं। संस्थाओं पर ऐसे वारो से देश का संघीय ढांचा चरमराने लगा है।
कौन इस बात से इंकार कर सकता है कि नोटबंदी, बेरोजगारी, किसानों की बढती आत्म हत्या, बैंको की खस्ता हालत, एससी-एसटी एक्ट, जीएसटी, सीबीआई, आरबीआई, ईडी, सुप्रीम कोर्ट, राफेल जैसे मामले पर मोदी सरकार घिरी नहीं है? और अब तो देश में 50 प्रतिशत बैंक ए टी एम बंदी की कगार पर पहुंच गए हैं।
मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, मिजोरम, तेलंगाना के विधान सभा चुनाव में जो भी परिणाम सामने आए लेकिन परिणामों से मोदी सरकार डरी हुई है। इन तमाम मामलों से देश की जनता का ध्यान हटाने के लिए अब राम मंदिर का मुद्दा गरमाया जा रहा है। इसी क्रम में मोदी-योगी सरकारें मिल कर 25 नवम्बर को अयोध्या में ध॔म सभा बुलाकर 5 लाख लोग इकट्ठा किए जा रहे हैं लेकिन अब कौन सरकार गारंटी लेगी कि वहां का माहौल खराब नहीं होगा और ढांचा स्थल यथा-स्थित बना रहेगा?

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