Tevar Times
Online Hindi News Portal

अब बिहार की लीची को बदनाम करने का प्रयास?

0
नरेश दीक्षित

बिहार के 12 जनपदों में फैले एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम ( एइस ) दिमागी बुखार या ‘चमकी’ के कारण एक सैकड़ा से अधिक मासूम बच्चों की अकाल मौत का ठीकरा मुजफ्फरपुर की प्रख्यात रसीली लाल लीची को बदनाम किया जा रहा है।
बिहार के चिकित्सा विशेषज्ञ एवं वहाँ की सरकार के मंत्रियों ने बेजुबान फल लीची को खाने से बच्चों की मौतों का एक कारण हो सकता है, कहते है। शोधों के अनुसार लीची को बच्चों की मौतों के पीछे छिपे कई कारणों में से सिर्फ एक सम्भावित कारण माना गया है?
वैसे लीची फल को सारे देश के बच्चे, बूढ़े, जवान सभी खाते हैं और आज से नहीं सैकड़ों वर्षो से लाल रसीली लीची मई-जून महीना आते ही इसका बेसब्री से इंतजार होने लगता है। बिहार सरकार बच्चों की मौतों का असली कारण न ढूंढ पाने पर लीची पर ठीकरा अब फोड़ रही है।
जबकि मुजफ्फरपुर की लीची बिहार की शान है बिहार के बच्चे सीजन में सदियों से लीची खाते हुए बड़े हो रहे है। अगर लीची खाने से बच्चे मरते तो देश बड़े शहरों के बच्चे भी मरते लेकिन ऐसा तो कहीं नहीं हुआ।
सिर्फ गरीब परिवारों के कुपोषित बच्चे ही इस बीमारी से क्यों मर रहे हैं इसका जवाब न तो बिहार सरकार दे पा रही हैं और न देश के चिकित्सा विशेषज्ञ?
मुजफ्फरपुर की लाल लीची दिल्ली, लखनऊ, कोलकता, भोपाल, बेंगलूर, चैन्नई, हैदराबाद, अहमदाबाद, मुंबई तक सभी लोग खाते हैं लेकिन मौतें सिर्फ मुजफ्फरपुर के ग्रामीण क्षेत्रों में ही क्यों हो रहीं हैं?
बताया जाता है कि हर साल समस्तीपुर, चंपारण, वैशाली,मुजफ्फरपुर इत्यादि जिलों में लीची का उत्पादन किया जाता है इस क्षेत्र के किसानों को लीची फसल से सीधे तौर पर उनके परिवारों की आजीविका जुड़ी हुई हैं ।
बिहार से लीची समस्त राज्यों में भेजी जाने वाली लीची बिहार के किसानों को लगभग 85 करोड़ रूपये तक का व्यवसाय हो जाता है। ऐसे में लीची की हो रही बदनामी से बिहार के किसानों के पेट पर हमला है।
देश का कोई भी विशेषज्ञ सबूतों के साथ कुछ नहीं कह रहा है सिर्फ अफवाहों के आधार पर लीची को बदनाम किया जा रहा है।
राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केंद्र के निदेशक डा विशाल नाथ का कहना है कि सैकड़ों सालों से लीची उगा कर खाने वाले भारत में इंसेफेलाइटिस विवाद के बाद इस फ़सल पर हमेशा के लिये खत्म हो जाने के लिये खतरा मंडरा रहा है ?
अगर ऐसा ही आगे चलता रहा तो लीची के लिए मुजफ्फरपुर क्षेत्र के किसान खेती छोड़ने के लिए मजबूर हो जायेगें? जबकि डाक्टर विशाल नाथ के अनुसार लीची सीधे-सीधे इंसेफेलाइटिस के लिए जुम्मेदार नहीं है।

Leave A Reply

Your email address will not be published.

This website uses cookies to improve your experience. We'll assume you're ok with this, but you can opt-out if you wish. Accept Read More