Tevar Times
Online Hindi News Portal

भाजपा का जादुई तिलिस्म टूटना शुरू?

0
नरेश दीक्षित
संपादक (समर विचार)

संगठित विपक्ष के आगे मोदी-अमित शाह का देश की जनता पर जादुई तिलिस्म टूटने लगा है देश के कई प्रदेशो में हुए लोक सभा एवं विधान सभा उप चुनाव में केन्द्र व राज्य सरकारो के प्रधानमंत्री से लेकर मुख्य मंत्रियो के धूंआ धार प्रचार से भी भाजपा की लाज नही बच पाई। 2014 के चुनाव में जो दल हांसिए पर चले गए थे उन दलो को चुनाव में संजीवनी तो मिल ही गई है?
संयुक्त विपक्ष मजबूत होकर 2019 के चुनाव में मोदी सरकार को चुनौती देने के लिए खड़ा हो गया है। सरकार द्बारा विकास की घोषित, योजनाओ से देश के किसान, मजदूर बेरोजगार नौजवान, छात्र, छात्राओ, लघु उद्योग इत्यादि अपने को ठगा सा महसूस करने लगे है और मोदी सरकार से नाराज होते जा रहे है ।इसका परिणाम यह हुआ कि उप चुनाव के परिणामों से भा ज पा परास्त हो गई।

अब देश एवं प्रदेश के नेतृत्व को सोचना पड़ेगा कि  भाषणों से जनता को जीता नही जा सकता उसके लिए ग्राउंड लेबिल पर विकास कार्य करना होगा।  विपक्ष अब देश का प्रधान मंत्री कौन होगा इस पर माथापच्ची नही कर रहा है उसके लिए तो सरकार समर्थक, चैनल समाचार पत्र, कार्पोरेट मीडिया घराने प्रधान मंत्री का मुद्दा उछाल कर विपक्षी एकता को तोड़ने का अभियान शुरू किये हुए है।
अब विपक्ष का एक ही मकसद बन गया है एक जुट होकर मोदी सरकार को 2019 के संसदीय चुनाव चुनाव में पटकनी देकर सत्ता से बाहर किया जाए। उत्तर प्रदेश में योगी सरकार जिस ताम झाम से पदारूढ हुई थी ,तो लगता था प्रदेश की हालत अब बेहतर होगी, लेकिन सरकार के एक साल के कार्यकाल को देखने से ऐसा नही लग रहा कि योगी जी कुछ कर पायेंगे।
Beginning of the end of BJP
Beginning of the end of BJP
गिरती कानून व्यवस्था, किसानो की बदहाली, वेरोजगार नौजवानो की बढ़ती संख्या, विद्युत कटौती 18,20,24 घंटे विद्युत देने की घोषणा सिर्फ हवाई ही जनता की नजरो साबित हो रही है। योगी जी सत्ता में बैठने के बाद बड़ी संख्या में दिल्ली से आयातित अधिकारियो की टोली भी लेकर आए लेकिन यह टोली भी विकास कराने में असफल नजर आ रही है। सरकार की खनन नीति, शराब नीति, भी असफल रही है।
प्रदेश के विकास के नाम पर समिट का आयोजन कर योगी ने पहल तो अच्छी की थी लेकिन अधिकारियो के अति उत्साह के कारण बिना जमीनी हकीकत समझे इस कार्य में भी खास प्रगति होती नजर नही आ रही है। योगी जी कुछ दबंग एवं भ्रष्ट अधिकारियों के घेरे फंस गए है जो जनता की मूलभूत समस्याओ से दूर किए हुए है। कई अधिकारियों के पास एक से अधिक विभाग होने के कारण भी विकास कार्य अवरुद्ध हो रहा है और सरकार की भी छबि धूमिल हो रही है।

उप चुनाव के हार के बाद भाजपा अब समीक्षा करेगी तथा बतायेगी कि अंदरूनी कलह, प्रत्याशी का सही चयन न होना आदि इत्यादि। लेकिन असली कारणों की समीक्षा नही करेगी कि चार सालों में देश की जनता से किए वादे पर कितना अमल हुआ है। ऊधर जी एस टी, नोटबंदी से छोटे, मझोले, लघु उद्योग के साथ ही समाचारपत्रो पर जिन पर हमेशा टैक्स की छूट रही है।
अब टैक्स थोप कर बंदी की कगार पर क्या नही पहुंचाया जा रहा है? दो करोड़ व्यक्तियों को प्रति वर्ष रोजगार देना तो दूर रहा उल्टे जो रोज़गार  चल रहे है उन्हे भी बंद कर बेरोजगारो की संख्या बढ़ाने का काय॔ क्या सरकार नही कर रही है? सरकार के पास अभी भी एक वर्ष का समय है यदि मोदी सरकार अपनी घोषित नीतियों में संशोधन नही करते है तो इसी वर्ष होने वाले मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ के विधानसभा चुनाव में भी वहाँ की सरकारें  पुनः सत्ता रूढ़ हो पायेगी इसमें संशय बना हुआ है?

Leave A Reply

Your email address will not be published.

This website uses cookies to improve your experience. We'll assume you're ok with this, but you can opt-out if you wish. Accept Read More