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कारपोरेटीकरण के ख़िलाफ़ कर्मचारियों का संघर्ष!

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नरेश दीक्षित

देश के विभिन्न राज्यों में स्थित भारत सरकार की आयुध निर्माता फ़ैक्टरियों के 88000 हज़ार मज़दूर 20 अगस्त से एक महीने की हड़ताल पर हैं। वे केन्द्र सरकार से आयुध सेक्टर के निगमीकरण (कारपोरेटीकरण) पर रोक लगाने की माँग कर रहे है। आयुध सेक्टर का निजीकरण कांग्रेस सरकार के समय शुरू हुआ था।  जिसे मोदी सरकार ने 2014 के बाद और तेज़ कर दिया, जिसका मक़सद इसे कारपोरेट घरानों को सौंपना था।
अब मोदी -2 के तहत जैसा कि इसके पहले बजट में घोषणा की गई है, सम्पूर्ण आयुध सेक्टर के कारपोरेटिव करण का प्रस्ताव है। इन कारख़ानों की मज़दूर यूनियनों ने कहा है कि जब तक सरकार कारपोरेटिवकरण के अपने फ़ैसले को वापस नहीं लेती है यह हड़ताल जारी रहेगी। मोदी -2 के तहत मज़दूरों पर हमला तेज़ हो गया है, उनके संगठित होने, संघर्ष करने और जीने लायक़ न्यूनतम वेतन एवं भत्ता पाने के अधिकारों को छीना जा रहा है।
मोदी -2 के बजट में जहाँ कारपोरेट घरानों के लिए कई अतिरिक्त घोषणाएँ की गई है, वही बचे हुए सार्वजनिक उपक्रमों में विनिवेश कर बेचा जा रहा है सा उनका निजीकरण किया जा रहा है। आर्थिक सुस्ती के नाम पर और अधिक मुनाफ़ा के नाम पर लाखों मज़दूर काम से निकाल दिये गये है। इस परिस्थिति में मज़दूर वर्ग के पास हड़ताल करने और समझौताहीन संघर्ष करने का ही एकमात्र रास्ता बचा है।

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