नरेश दीक्षित

भारत छोड़ो आन्दोलन की 77 वीं वर्षगांठ के अवसर पर प्रदेश सरकार द्वारा एक ही दिन में 9 अगस्त 2019 को 22 करोड़ पौध रोपड़ का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। वृक्षारोपण के इस अभियान को प्रदेश सरकार का सरकारी अमला चुनावी पैटर्न (इलेक्शन मोड) की तरह संपन्न कराने जा रही है। जिसमें वन एवं वनजीव विभाग 6,53 करोड़ पौधों का रोपण एवं प्रदेश के अन्य विभागों द्वारा 15,47 करोड़ पौधों का रोपण किया जायेगा।
कुल मिलाकर एक ही दिन में सुबह सात बजे से सायं पांच बजे तक 22 करोड़ पौधों का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। उत्तर प्रदेश में वन विभाग के 75 वन प्रभाग है पहले इन प्रभागों में 7 करोड़ पौध रोपित होने थे लेकिन अब लक्ष्य घटना कर 6,33 करोड़ कर दिया गया है।
वृक्षारोपण का यह कार्यक्रम वन विभाग के अतिरिक्त समस्त शासकीय विभागों, मा न्यायालयों, कृषकों, संस्थाओं, व्यक्तियों, निजी एवं शासकीय शिक्षण संस्थानों, प्रदेश में स्थित भारत सरकार के समस्त विभाग, स्थानीय निकाय, ग्राम पंचायत, नगर पंचायत, नगर निगम, पालिका परिषद इत्यादि विभागों को वन विभाग की प्रदेश में मौजूद 1490 पौधशालाओं से निशुल्क पौध उपलब्ध कराने के आदेश प्रमुख सचिव वन द्वारा जारी किए गये है।

जबकि हकीकत यह है कि वन विभाग की पौधशालाओं में पूर्व के शासनादेश के अनुसार 12 फिट की 22 करोड़ पौध उपलब्ध ही नहीं है तो फिर 9 अगस्त को कैसे चुनावी मोड में पौधों का मतदान होगा? मुख्य सचिव के शासनादेश देश संख्या 593/81-5-2019-03/2019 दिनांक 22 जुलाई 2019 को जारी शासनादेश में स्पष्ट है कि सरकार प्रदेश को हरा-भरा व प्रदूषण मुक्त कर स्वच्छ वातावरण उपलब्ध कराने के लिए कृत संकल्पित है।
किन्तु विभागीय अधिकारियों द्वारा वृक्षारोपण की फर्जी रिपोर्टिंग करने की तैयारी कर ली गई है। प्रदेश के 75 वन प्रभागों में से अधिकांश में पौध रोपड़ लगभग आंकड़ों में पूण॔ कर लिया गया है जिसे 9 अगस्त को गिना दिया जायेगा। जबकि प्रदेश के वन प्रभागों में न तो गड्ढे पूर्ण रूप से खोदे गए है और न ही मृदा कार्य ही पूर्ण हुआ है।
वन नर्सरियों में निर्धारित मानक की लम्बाई 12 फिट के स्थान पर दो-ढाई फिट की पौध उपलब्ध है वह भी मांग के अनुसार नहीं है। सरकार ने पिछले वर्ष भी 11 करोड़ का पौध रोपड़ अपने आंकड़ों में किया था जिसे बढाकर इस वर्ष सरकार ने अति उत्साह में 22 करोड़ कर दिया है। इस लक्ष्य को पुरा करने के लिए सरकार की आंखों में धूल झोंकी जा रही हैं? प्रदेश सरकार ने इस वर्ष का वृक्षारोपण चुनावी पैटर्न पर करने जा रही है।
पौध को मतपत्र, ग्राम पंचायत को पोलिंग बूथ, ग्राम प्रधान पंचायत सचिव एवं ग्राम विकास अधिकारी में से किसी को पीठासीन अधिकारी के रूप में रखते हुए प्रत्येक जनपद को सेक्टर व जोन में विभाजित किया गया है  ग्राम पंचायत सत्तर पर ग्राम प्रधान,वृक्ष अभिभावक तथा पंचायत सचिव/ ग्राम विकास अधिकारी वृक्षारोपण कार्य सम्पन्न करायेंगे। इसके अतिरिक्त दिनांक 9 अगस्त को पौधारोपण की संकलित सूचना ग्राम पंचायत स्तर से खण्ड विकास अधिकारी को एक-एक घण्टे के अन्तराल पर उपलब्ध करायेंगे।
शासन ने चुनाव की तरह 9 अगस्त को फूलप्रूफ व्यवस्था कागजों पर कर ली है लेकिन यह वृक्षारोपण का मतदान जो सरकारी ईवीएम में कैद हो चुका है उस 22 करोड़ पौध रोपड़ की गिनती 9 अगस्त को सुबह 7 बजे से सायं 5 बजे तक होगी?  सरकार क्यों नहीं हर जिले,तहसील,ब्लाक स्तर पर पत्रकारों की पांच सदस्यीय टीम गठित कर जांच करा लेती है फील्ड की हकीकत सरकार के सामने आ जायेगी?
मथुरा आये और ये मिठाई नहीं खाई तो कुछ नहीं खाया
सूचना अधिकार पर अब सरकार का अंकुश!

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