एक माह में पुस्तक का दूसरा संस्करण संस्कृत की लोकप्रियता का प्रमाणित: राज्यपाल

इलाहाबाद। उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक ने शनिवार को इलाहाबाद में ‘संस्कृत विद्वत गोष्ठी’ में कहा कि संगोष्ठी का महत्व इसलिये और अधिक बढ़ जाता है कि संगम नगरी प्रयाग में जैसे तीन नदियों का संगम है उसी तरह इसका आयोजन तीन आयोजकों द्वारा हुआ है।

राज्यपाल ने लेखक के रूप में अपने विचार व्यक्त करते हुए पुस्तक ‘चरैवेति! चरैवेति!!’ लिखने पर विस्तृत प्रकाश डाला। राज्यपाल ने कहा कि ‘चरैवेति! चरैवेति!!’ के संस्कृत संस्करण के लोकार्पण में काशी नगरी के संस्कृत प्रेमियों ने बताया कि किसी संस्कृत पुस्तक के विमोचन में इतनी बड़ी संख्या में उपस्थिति देखने को नहीं मिली।
राम नाईक पुस्तक ‘चरैवेति! चरैवेति!!’ के संस्कृत अनुवाद पर उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थानम्, श्रीमद् आर्यावर्त विद्वत परिषद एवं उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र इलाहाबाद के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित गोष्ठी में लेखक के रूप में अपने विचार व्यक्त कर रहे थे।

इस अवसर पर प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह, महिला कल्याण एवं पर्यटन मंत्री डॉ0 रीता बहुगुणा जोशी, स्टाम्प शुल्क मंत्री नंदगोपाल नंदी, संस्कृत संस्थानम् के अध्यक्ष डॉ0 वाचस्पति मिश्र, आर्यावर्त विद्वत परिषद के अध्यक्ष डॉ0 रामजी मिश्र, उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र के निदेशक इन्द्रजीत ग्रोवर, उत्तर प्रदेश राजर्षि टण्डन मुक्त विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो0 एमपी दुबे, पत्रिका राष्ट्रधर्म के सम्पादक प्रो0 ओमप्रकाश पाण्डेय सहित बड़ी संख्या में विद्वतजन एवं संस्कृति प्रेमी उपस्थित थे।
राज्यपाल ने कहा कि संस्कृत भाषा हमारी प्राचीन भाषा है जो समृद्ध है और राजनीति से परे है। उनकी पुस्तक के संस्कृत संस्करण का प्राक्कथन डॉ0 कर्ण सिंह द्वारा लिखा गया है। राष्ट्रीय पुस्तक न्यास, भारत ने 60 वर्षों में विभिन्न भाषाओं में हजारों पुस्तक प्रकाशित की हैं परन्तु पुस्तक ‘चरैवेति! चरैवेति!!’ प्रथम संस्कृत पुस्तक हैं जिसका प्रकाशन न्यास द्वारा किया गया है।
संस्कृत का साहित्य बहुत सम्पन्न है परन्तु आत्मकथा के रूप में ‘चरैवेति! चरैवेति!!’ प्रथम पुस्तक है। राज्यपाल ने बताया कि संस्कृत संस्करण के प्रकाशन के एक माह में दूसरा संस्करण प्रकाशित हुआ जो संस्कृत की लोकप्रियता को प्रमाणित करता है। उन्होंने बताया कि पुस्तक का अन्य भारतीय भाषाओं सहित विदेशी भाषा में भी अनुवाद हो रहा है।
नाईक ने कहा कि संस्कृत भाषा संस्कृति का मेरूदण्ड है तथा समग्र विकास की जननी है। संस्कृत का विशाल साहित्य आज भी सूक्ष्म चिंतन की वाहिनी है। राज्यपाल ने बताया कि बचपन से ही संस्कृत भाषा से उनका विशेष लगाव रहा है। विद्यालय में उन्होंने गीता का पठन किया है। प्रथम बार सांसद निर्वाचित होने पर उन्होंने संस्कृत में शपथ ली थी। राज्यपाल ने ‘चरैवेति! चरैवेति!!’ का मर्म बताते हुए सूर्य के समान जगत् वंदनीय होने के लिए निरन्तर चलते रहने को सफलता प्राप्ति का मंत्र बताया।

सामाजिक और नैतिक मूल्य का दर्पण है ‘चरैवेति! चरैवेति!!’: सिर्द्धाथ नाथ

स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह ने कहा कि सामाजिक और नैतिक मूल्य का दर्पण है ‘चरैवेति! चरैवेति!!’। पुस्तक दर्पण है कर्तव्य बोध का। मुंबई को उसका असली नाम दिलाने, डॉ0 आंबेडकर का सही नाम लिखने, उत्तर प्रदेश दिवस का आयोजन आदि राज्यपाल श्री नाईक के प्रयास के कारण ही संभव हुए हैं। उन्होंने कहा कि राज्यपाल का जीवन कठिनाईयों का सामना करने की प्रेरणा देता हैं।

‘चरैवेति! चरैवेति!!’ जीवन को संस्कार से जोड़ने वाली पुस्तक है : रीता बहुगुणा

महिला कल्याण एवं पर्यटन मंत्री ने कहा कि पुस्तक ‘चरैवेति! चरैवेति!!’ जीवन को संस्कार से जोड़ने वाली पुस्तक है। पुस्तक देखने का सबका अपना-अपना नजरिया है। पुस्तक में गरीबों और मेहनत करने वालों का उल्लेख है। उन्होंने कहा कि श्री नाईक जमीन से जुड़े व्यक्ति हैं जिनका पूरा जीवन प्रेरणा का स्रोत है।
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