कुशीनगर। जिले में लोकसभा चुनाव की सुगबुगाहट के बीच खड्डा विधानसभा के पिपरा बुजुर्ग गांव के मिश्रौली टोले के ग्रामीणों ने राजनीतिक दलों के लोगों का विरोध शुरू कर दिया है। अब तक गांव में सड़क न होने से नाराज लोगों ने राजनीतिक दलों के लोगों से लोकसभा चुनाव के प्रचार के लिए गांव में आने से मना करते हुए बकायदा बैनर लगा दिया है।
लोगों का कहना है कि इस गांव में बरसात के समय बीमारों को चारपाई पर लादकर दो किमी तक ले जाना पड़ता है। एकजुटता प्रदर्शित करते हुए ग्रामीणों ने किसी भी प्रत्याशी को वोट न देते हुए इस बार नोटा का बटन दबाने का एलान कर दिया है। अकेले इस टोले पर ही लगभग 400 मतदाता हैं।
सोमवार को नेबुआ नौरंगिया ब्लॉक के पिपरा बुजुर्ग के टोला मिश्रौली के ग्रामीणों ने गांव में एक सार्वजनिक जगह पर 2019 में नोटा प्रयोग करने का बैनर लगा दिया। गांव वालों के अनुसार गांव में अब तक कोई पिच सड़क ना होने व तमाम समस्याओं को लेकर यह फैसला किया गया है। आजादी के 70 वर्षों के बाद भी गांव के इस टोले पर एक भी पिच सड़क नही हैं। जो है भी वो टूटी पड़ी हैं।
बरसात में इन रास्तों का उपयोग नहीं के समान हो जाता है। कई मासूम बच्चे गिरकर चोटिल हो जाते हैं। तो वहीं हर साल दर्जनों बच्चे संक्रामक बीमारियों से गम्भीर रूप से चपेट में आ जाते हैं। इन सभी समस्याओं का जिम्मेदार सभी राजनीतिक दलों व जनप्रतिनिधियों को मानते हुए ग्रामीणों ने यह फैसला सुनाया है।
गांव वालों की मानें तो पक्की सड़क ना होने के नाते 2 किलोमीटर तक बीमार को चारपाई पर लादकर मुख्य सड़क या साधन तक ले जाना पड़ता है। जहां सरकार मोबाइल अस्पताल जैसी योजनाओं को लेकर आ रही है। वहीं इस टोले पर साधन जाने के लिये रास्ता ही नहीं है। मिश्रौली के लोगों के इस फैसला खूब चर्चा में आ गया है।
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