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कब्र में दफन हो गया दुनिया को अदब की रोशनी देने वाला चिराग 

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  • सदियों तक महकेगी अनवर जलालपुरी के कब्र की मिट्टी

  • हजारों की भीड़ के साथ सुपुर्दे खाक हुए अनवर जलालपुरी

घनश्याम भारतीय

अंबेडकरनगर। मेरे जमीर की चादर पे कोई दाग नहीं, तमाम उम्र इसे आसुओं से धोया है। यू मेरे कब्र की महकेगी एक दिन मिट्टी, रहे हयात में मैने गुलाब बोया है। मुशायरों की सफलता की जमानत रहे उस्ताद शायर अनवर जलालपुरी (Anwar Jalalpuri) के शागिर्द अनिल जलालपुरी द्वारा लिखा गया यह शेर आज उन्हीं के उस्ताद मरहूम अनवर जलालपुरी की अंतिम यात्रा पर उमडी भीड पर अक्षरशः लागू हुआ।

anwar jalalpuri with a crowd of thousands
anwar jalalpuri with a crowd of thousands

जब जाति धर्म और सम्प्रदाय की सकीर्णता भरी दीवार को तोड कर हजारों की तादात में लोगों ने अंतिम दर्शन के उपरांत अनवर जलालपुरी (Anwar Jalalpuri) को उनके घर के निकट से बहने वाली तमसा नदी के तट पर स्थित रूहाबाद कब्रिस्तान में सुपुर्देखाक किया। इस मौके पर उपस्थित लोगों की आंखे नम रही। उनकी अंतिम यात्रा में उमडी भीड और उसके भाव को देख कर बरबस ही अनिल जलालपुरी का यह शेर याद आया।

उल्लेखनीय है कि भारत सहित दुनिया के तमाम देशों में अपनी बेहतरीन आवाज के लिए मशहूर हुए अनवर जलालपुरी को बीते 28 दिसम्बर को ब्रेन हेमरेज होने के बाद लखनऊ स्थित मेडिकल कालेज भर्ती कराया गया था जहां दो जनवरी को प्रातः 10 बजे इलाज के दौरान अंतिम सास ली।

यह खबर सुनते ही इलाके में शोक की लहर दौड गयी थी। कल देर रात उनका पार्थिव शरीर लखनऊ से उनके पैतृक गृह दलाल टोला जलालपुर लाया गया। जहां आज दिन में दो बजे तक दर्शनार्थ रखा गया। दोपहर की नवाज के बाद निकली उनकी अंतिम यात्रा में नगर ही नहीं आसपास के लोगों सहित जनपद वासियों को हुजुम तो उमडा ही देश के कोने कोने से आये तमाम कवियों शायरों और साहित्यकारों ने उन्हें खिराजे अकीदत पेश की। तदुपरांत उनकी शव यात्रा दलाल टोला से निकल कर नगर के विभिन्न गलियों मोहल्ले से होते हुए तमसा तीरे रूहाबाद कब्रस्तान पहुंची जहां नमाजे जनाजा के बाद उन्हें सुपुर्दे खाक किया गया।

यह भी गौर करने की बात है कि गंगा जमुनी तहजीब के लिए देश भर में मशहूर जलालपुर कस्बे की गलिया आज दूसरे दिन भी उदास रही। पावर लूमों की खटर पटर के साथ गूजने वाली शायरी के स्वर मौन रहे। गलियों में प्रायः गूजने वाली बच्चों की किलकारियां भी शांत रही।

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