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योगी के तीन साल: प्रदेश ने क्या खोया, क्या पाया?

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नरेश दीक्षित


19 मार्च 2017 को प्रदेश में योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व मे गठित नई सरकार शान्ति, सुरक्षा का माहौल पैदा करने तथा युवाओं, किसानों, उद्यमियों को विकास परक सकारात्मक परिवेश देने का कार्य तेजी से किया।

प्रदेश में इन्वेस्टर्स समिट पर भले ही उसके प्रचार-प्रसार पर करोड़ों रूपया खर्च किया हो लेकिन 4़.65 लाख करोड़ रूपये के पूॅजी निवेश के प्रस्ताव देश के उद्योगपतियों से प्राप्त हुए थे। लेकिन अभी तक प्रदेश में एक भी उद्योग नहीं लगा है।

 

फिर भी उनका प्रयास सराहनीय रहा। इसी क्रम में 29 जुलाई 2018 को ग्राउण्ड ब्रेकिंग सेरेमनी का आयोजन किया गया और 60 हजार करोड़ रूपये के निवेश का होना बताया गया था लेकिन क्या हुआ यह हकीकत प्रदेश की जनता के सामने है?

प्रयागराज कुम्भ 2019 पर योगी सरकार ने 1.2 लाख करोड़ से भी अधिक खर्च किया इसकी ब्राडिंग अन्त॔राष्ट्रीय स्तर पर की गई तथा कई विश्व रिकार्ड भी बनाये थे। कुम्भ स्वच्छता भी गिनीज बुक में दर्ज है।

प्रयागराज कुम्भ में 5 हजार मोबाइल शौचालय का दावा किया गया था लेकिन वमुश्किल 15 सौ शौचालय बने थे। साफ सफाई तथा ब्लीचिंग डालने के नाम पर 2 हजार करोड़ का गोलमाल हुआ, मेला क्षेत्र में 5 हजार एलईडी लगाई गई थी जिसमें बड़ा घोटाला हुआ था।

महाराष्ट्र की गायकबाड़ एण्ड कम्पनी को पुलिस मित्र का ठेका मिला था। हजारों पुलिस मित्र पैसा लेकर बनाये गये थे। मतलब यह है कि प्रयागराज कुंभ में करोड़ों रूपये की फिजूल खर्ची कर इसे अन्त॔राष्ट्रीय स्तर का बनाया गया लेकिन इसमें दो राय नहीं है कि योगी सरकार की कुंभ व्यवस्था हर स्तर पर प्रशंसनीय थी।

योगी सरकार ने 15वाॅ प्रभावी भारतीय दिवस 21-23 जनवरी 2019 को काशी में मनाया था। जिसमें 132 देशों के 2800 से अधिक प्रवासी मेहमानों ने इसमें हिस्सा लिया था।

कहने को यह प्रवासी सम्मेलन प्रदेश के विकास में पूॅजी निवेदन करने के लिये था लेकिन इस सम्मेलन जिसमें करोड़ों रूपये खर्च हुए थे महज फ्री में पर्यटन का सुनहरा अवसर प्रवासियों को प्रदान करना था।

प्रवासी सम्मलेन को प्रधानमंत्री मोदी ने शुभारम्भ किया था। तथा कार्यक्रम में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद भी शामिल हुए थे। लेकिन प्रवासियों का प्रदेश में निवेश अभी तक शून्य है।

देश में प्रदेश हो सकता है कई मामलों में नंबर 1 पर हो पर प्रधानमंत्री आवास योजना, ग्रामीण क्षेत्र में 2 करोड़ 61 लाख परिवारों को शौचालय, सौभाग्य योजना, ई-टेण्डरिंग प्रणाली, मण्डी अधिनियम, कौशल विकास, गढ्ढा मुक्त सड़क इत्यादि का झूठा प्रचार होता है।

ग्रामीण शौचालयों के नाम पर जम कर लूट हुई है। ग्राम प्रधान, पंचायत, सचिव ने निर्धन, असहाय, परिवारों को इससे दूर रखा है। अधिकांश शौचालय उन्हीं परिवारों के दिए हैं जिन्हें पहले की योजनाओं में शौचालय मिल चुके थे।

अधिकांश परिवार अब भी छूट गये हैं। योगी सरकार का प्रदेश की सड़कों को गढ्ढा मुक्त करने अभियान भी ढकोसला साबित हुआ है शहरी इलाकों में छोड़कर ग्रामीण क्षेत्रों और छोटे शहरों नगरों में गढ्ढा मुक्त के नाम पर सिर्फ लूट हुई है।

सड़कें गढ्ढों में हैं या गढ्ढे सड़कों मे है यह कहना मुश्किल है। प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए चयनित सूची में उन्हीं बेईमानों को अधिक लाभ मिला है जिन्हें इसका पहले भी लाभ मिल चुका था प्रधानमंत्री आवास की जो गाइड लाइन बनाई गई थी उसकी नगरों से लेकर ग्रामीण क्षेत्रोें में जमकर धज्जियाॅ उड़ाई गई हैं।

और अपने ही चहेतों को आवास उपलब्ध कराये गये हैं। योगी सरकार स्वास्थ्य सुधार के लिए प्रदेश में 15 मेडिकल कालेजों की स्थापना करा रही है। अयोध्या, बस्ती, बहराइच, फिरोजाबाद, बदायूॅ, शाहजहाॅपुर, एटा, हरदोई, प्रतापगढ़, फतेहपुर, देवरिया, सिद्धार्थनगर, गाजीपुर तथा मिर्जापुर में मेडिकल कालेज का निर्माण कार्य जारी है।

योगी जी ने ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था दुरूस्त करने के लिए प्रत्येक रविवार को हर पीएचसी पर विशेषज्ञ डाक्टरों की उपस्थिति में आरोग्य मेला लगाए जाने की घोषणा की है प्रदेश में लगभग 4200 पीएचसी है, अधिकांश पर न तो डाक्टर हैं

और न ही पैरामेडिकल स्टाफ, विशेषज्ञ डाक्टरों का तो कोई सवाल ही नहीं है। प्रदेश के जिला अस्पतालों पर दवाईयों का भारी अभाव है तो पीएचसी की हालत क्या होगी । अच्छी तरह से समझा जा सकता है?

योगी सरकार एवं अधिकारी कितने फ्रिकमंद हैं यह इसी से जाहिर है कि प्रदेश में 36 पी0एच0सी0 एक वर्ष से अधिक समय से निर्मित खड़ी है लेकिन अभी तक उपकरण, मशीन, साज सज्जा, सामग्री तक नहीं पहुंचीं है। डाक्टर एवं दवाईयों का तो कोई सवाल ही नहीं उठता।

यह मात्र सफेद हाथी बनकर रह गये है। कहीं ऐसा न हो प्रदेश में बन रहे 15 मेडिकल कालेजों का हाल सफेद हाथी साबित हो। गोरखपुर मेडिकल कालेज में आक्सीजन की कमी से 72 बच्चों की मौत भी योगीराज में सुर्खिया बटोर चुकी है।

किसी प्रदेश के विकास के लिए बिजली अपरिहार्य है लेकिन सरकार के तीन साल के शासन में अभी तक एक भी पावर प्रोजेक्ट चालू नहीं हुआ है ग्रामीण क्षेत्रों में 16 से 18 घंटे बिजली आपूर्ति की बात की जाती है लेकिन वास्तविकता इससे भिन्न है।

लाइन मैन, स्कल्ड कुलियों तथा अन्य स्टाफ की भारी कमी के कारण बिजली सप्लाई में निरंतर व्यवधान आते रहते हैं। गाॅवों, मजरों में बिजली पहुॅचाने के लिए खम्भे गाड़ने का कार्य तो किया गया है

लेकिन बिजली नहीं पहुॅची है फिर भी गाॅवों में घर-घर स्मार्ट मीटर लगा दिये गये है और बिजली के बिना, बिल आने लगे हैं। फलस्वरूप ग्रामीण विद्युत उपभोक्ता परेशान हैं।

योगी सरकार ने इन्फ्रास्ट्रक्चर बढ़ाने के लिए अभूतपूर्व प्रयास किये हैं लेकिन सरकार बनते ही 341 कि0मी0 लम्बे पूर्वांचल एक्सप्रेस वे जिस पर तेजी से कार्य प्रारंभ हो गया था योगी सरकार ने यह कह कर उन बिडो को निरस्त कर दिया कि इसमें लागत अधिक आ रही है फलस्वरूप पूर्वांचल एक्सप्रेस वे जो 2019 में बनकर तैयार हो जाना था अभी तक नहीं हो पाया है।

बजट कम दिखाने के नाम पर एक्सप्रेस वे की मीडियन की चैड़ाई कम कर दी, बनारस लिंक को हटा दिया, मिट्टी की रायल्टी फीस समाप्त कर दी, साइड एमेनिटीज व सोलर प्लाट का कार्य अन्य माध्यमों से कराने पर 1797 करोड़ की बचत का दावा किया गया था?

लेकिन आज हालत यह है कि पूर्वांचल एक्सप्रेस वे मानक विहीन तो बनाया ही जा रहा है साथ ही 120.49 हे0 भूमि अभी तक अर्जित नहीं हो पाई है? परियोजना के पैकेज 1,2,5,6,व 8 में सीएनजी तथा अर्थ वर्क में लगभग 60 प्रतिशत ही कार्य हुआ है और अभी पुल, पुलिया, ओवर ब्रिज इत्यादि कार्य काफी पिछड़ा चल रहा है।

फिर भी पूर्वांचल एक्सप्रेस वे की प्रगति निरीक्षण के बाद योगी जी ने कहा था कि इसे हर हाल में दीपावली तक जनता को समर्पित कर दिया जायेगा लेकिन किस दीपावली तक?

बुुुंदेलखण्ड एक्सप्रेस वे, गोरखपुर लिंक एक्सप्रेस वे, डिफेंस इण्डस्ट्रियल कोरीडोर जिसका प्रधानमंत्री मोदी जी ने शिलान्यास भी कर दिया है लेकिन मात्र 1000 हे0 ही भूमि अभी तक अर्जित हो पाई है। बुंदेलखण्ड क्षेत्र के किसान जमीन देने का विरोध कर रहे हैं।

योगी सरकार ने अपने कार्यकाल के चौथेे बजट में देश के सबसे लम्बे गंगा एक्सप्रेस वे की निर्माण की घोषणा की है जो मेरठ से लेकर प्रयागराज तक 637 किमी का होगा बजट में 2000 हजार करोड़ रूपये की व्यवस्था की है यह स्वागत योग्य है लेकिन चिंता यह है क्या यूपिडा गंगा एक्सप्रेस वे बना पायेगा?

प्रदेश में बनने वाले 6 एक्सप्रेस वे में से 4 पर काम शुरू है । गंगा एक्सप्रेस वे, बलिया लिंक एक्सप्रेस वे अभी काम शुरू नहीं हुआ है। निश्चित ही योगी सरकार का इन्फ्रास्ट्रक्चर में अभूतपूर्व कार्य हुआ है जो उत्तर प्रदेश के विकास के लिए मील का पत्थर साबित होगा।

योगी सरकार से प्रदेश के किसान असंतुष्ट है गोवंश के संरक्षण के नाम पर छुट्टा गोवंश के कारण उनकी अफसलों का भारी नुकसान हो रहा है। सरकार की तमाम घोषणाओं के बाद, तथा करोड़ों की गोशालाओं के निर्माण, गोवंश भरण पोषण के भारी भरकम बजट से भी किसानों को कोई राहत नहीं मिली है।

रात-रात भर किसान जाग कर अपनी फसलों की सुरक्षा करते हैं गाँव में पशु बाडों की भारी कमी है। गोशालांए जो बनाई जा रही हैं वह न काफी है उनके निर्माण पर धन की बर्बादी हो रही है।

प्रदेश में पर्यटन एवं संस्कृति विभाग पर पर्यटकों को आकर्षित करने के लिये योगी ने करोड़ो रूपया पानी की तरह बहाया है लेकिन मथुरा, प्रयागराज, अयोध्या, वाराणसी के अलावा प्रदेश में कहीं भी पर्यटक नहीं बढ़ रहे है।

अयोध्या में दीपोत्सव के नाम पर 60 करोड़ रूपया खर्च कर गिनीज बुक में नाम तो दर्ज हो गया। आस्था की अंधी दौड़ में पर्यटन विभाग नोडल एजेन्सी बनाई गई थी दीपोत्सव में अवध विश्वविद्यालय के छात्रों ने दीप प्रज्जवलित किए थे।

पर्यटन ब्रांडिग के लिए ’’यूपी नहीं देखा तो इंडिया नहीं देखा’’ का प्रचार किया जा रहा है पर्यटन के विकास पर करोड़ों रूपये खर्च किये जा रहे हैं लेकिन फिर भी पर्यटन नहीं बढ़ रहे हैं।

वन एवं पर्यावरण विभाग लगातार 2017 में 5.70 करोड़, 2018 में 11.12 करोड़, 2019 में 22.59 करोड़ पौधों का एक दिन में रोपण कर विश्व रिकार्ड तो प्रतिवर्ष बना रहा है लेकिन हकीकत यह है कि विश्व रिकार्ड दर्ज होने के बाद इनकी कोई देखभाल नहीं होती।

जबकि इनके रोपड़ पर प्रति वर्ष करोड़ो रूपया खर्च किया जाता है। विभागीय भ्रष्टाचार के चलते जंगलों की अवैध कटान, वन भूमि पर अवैध कब्जे, निरन्तर हो रहे हैं और विभागीय अधिकारी सिर्फ भ्रष्टाचार में मशगूल हैं।

बुन्देलखण्ड एक्सप्रेस वे निर्माण के नाम पर 190297 हरे वृक्ष की काटने की अनुमति प्रदान की गई है । बुन्देलखण्ड वैसे भी सूखा प्रभावित क्षेत्र है वहाॅ लगभग दो लाख हरे व पुराने वृक्षों की कटान के बाद कितनी बड़ी पर्यावरणीय क्षति होगी यह कहना मुश्किल है।

प्रदेश की कानून व्यवस्था सुधार के लिए वर्ष 2017 में जब से योगी जी सत्ता में आये है लगातार भोंपू बजाया जा रहा है और जीरो टालरेन्स की बात की जा रही है। सरकार का कहना है कि प्रदेश के अपराधी या तो भाग गए हैं या जेलों में हैं लेकिन आज भी योगी सरकार का अपराधों पर कोई नियंत्रण नहीं है।

हत्या, बलात्कार, छेड़छाड़, लूट की घटनाएं निरन्तर बढ़ रही हैं। प्रदेश के जनप्रतिनिधियों पर बलात्कार के आरोप लगते रहे हैं इसमें सबसे अधिक चर्चित उन्नाव रेप पीड़िता का रहा है जिसमें कुलदीप सेंगर आरोपी थे पहले सरकार ने उन्हें बचाने का प्रयास किया था।

अन्ततः उन्हें जेल के अन्दर जाना पड़ा और सजा हुई इसी प्रकार शाहजहाॅपुर का चिन्मयानंद का मामला काफी चर्चित हुआ और योगी सरकार कटघरे में खड़ी नजर आई।

तत्कालीन एस0एस0पी0 वैभव कृष्ण गौतम बुद्धनगर के ट्रांसफर, पोस्टिंग खुलासे से शासन में हड़कंप मच गया था और जाॅच के बाद कई अधिकारियों को दंडित कर मामले को दबाने की सरकार ने पूरी कोशिश की थी। अब इस मामले को एस0आई0टी0 को सौंप दिया गया है।

महिलाओं पर अपराधों के मामले मे उत्तर प्रदेश नं0 1 पर है प्रदेश में 2019 तक 66994 रेप के मामले लम्बित थे। अपराधिक कानून अधिनियम 2018 के अनुसार प्रदेश में 218 फास्ट ट्रैक अदालते बननीं थी। लेकिन अभी तक एक का भी गठन नहीं हुआ है।

राज्य में महिलाओं, बच्चियों के साथ रोजाना रेप, हत्या, सामूहिक बलात्कार, छेड़छाड़ आदि की घटनाओं को रोकने के लिए पूरी तरह से विफल हैं। नेशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरों के अनुसार प्रदेश में घटने वाली घटनाओं में 59445 घटनाएं सिर्फ महिला अपराध, मानव तस्करी, यौन हिंसा एवं यौन अपराध से जुड़ी हुई हैं।

लखनऊ सहित पूरे प्रदेश में सी0ए0ए0 के प्रदर्शन को दबाने के लिए धारा 144 लगाने के बाद भी बड़े पैमाने पर हिंसा हुई थी जिसमें करोड़ों रूपये की सम्पत्ति को जला दिया गया था। प्रदेश का खुफिया विभाग पूर्ण रूप से फेल था प्रदेश में फैली हिंसा में कई व्यक्तियों की जाने गई थी।

जबकि योनी ने हाउस में कहा था कि प्रदेश में कोई हिंसा नहीं हुई और शान्ति है। जबकि तत्कालीन डी0जी0पी0 ओ0पी0 सिंह के बार-बार के संदेशों के बाद भी छात्र, वकील, सामाजिक संगठन, आम जनता सड़कों पर उतर कर प्रदर्शन किया था।

आज भी लखनऊ के घंटाघर में महिलाओं द्वारा सी0ए0ए0 पर प्रदर्शन किया जा रहा है। प्रदेश में हुए प्रदर्शनों एवं हिंसा के बाद योगी सरकार ने एलान किया था कि हिंसा में सरकारी सम्पत्ति को क्षति पहुॅचाने वालों की पहचान कर उनसे क्षतिपूर्ति की वसूली की जायेगी।

अब यह मामला हाई कोर्ट में है हकीकत यह है कि प्रदेश की कानून व्यवस्था में योगी जी के आश्वसनों के बाद भी कोई सुधार नहीं हुआ है।

योगी सरकार की उस समय और हास्यापद स्थिति हो गई जब विधानसभा के अन्दर अपनी बात रखने के लिए लगभग 200 विधायक सरकार के ही खिलाफ धरने पर बैठ गये थे। अंततः सरकार को उनकी बात सुननी पड़ी।

प्रदेश सरकार ने पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू की है जो ट्रायल के रूप में अभी लखनऊ, गौतम बुद्धनगर में शुरू की गई है यह कितनी कारगर होगी अभी भविष्य के गर्त में है।

योगी सरकार के कुछ ब्यूरोक्रेट सरकार की मंशा के अनुरूप कार्य करने में पूर्णतः फेल है लेकिन अपनी चाटुकारिता के कारण उच्च पदों पर आसीन हैं। योगी जी दिन-रात कड़ी मेहनत कर रहे हैं। लेकिन सड़ी गली शासन व्यवस्था के कारण उन्हे सफलता नहीं मिल पा रही है।

तथा कुछ ब्यूरोक्रेट अधिकारियों के तिलिस्म को तोड़ने में भी नाकाम रहे हैं। प्रदेश के विकास में कड़ी मेहनत तथा लगन के कारण प्रदेश का विकास, कानून व्यवस्था, भ्रष्टाचार पर योगी जी असफल रहे हैं।

लेकिन अपनी साफ सुथरी छवि के कारण उनपर किसी प्रकार का भ्रष्टाचार भी नहीं लगा है। अतः योगी सरकार के तीन वर्ष के कार्यकाल को प्रथम तो नहीं द्वितीय स्थान दिया जा सकता है?

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